पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
चर्चा में क्यों?
विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) तथा लुइस बिजनेस स्कूल द्वारा जारी विश्व अमूर्त निवेश रिपोर्ट, 2026 ने वैश्विक नवाचार शक्ति के रूप में भारत के उभरने की पुनः पुष्टि की है।
अमूर्त परिसंपत्तियाँ (Intangible Assets)
अमूर्त परिसंपत्तियाँ वे परिसंपत्तियाँ हैं जिनका कोई भौतिक स्वरूप नहीं होता, जैसे—
- संगठनात्मक विशेषज्ञता (Organisational Know-how)
- अनुसंधान एवं विकास (R&D)
- सॉफ़्टवेयर
- डेटाबेस
- ब्रांड
- डिजाइन
- बौद्धिक संपदा (IP)
कारखानों एवं मशीनों जैसी भौतिक परिसंपत्तियों के विपरीत इनका मूल्य ज्ञान एवं नवाचार पर आधारित होता है। उदाहरण के लिए, एक इलेक्ट्रिक व्हीकल का अधिकांश मूल्य उसकी बैटरी प्रौद्योगिकी, सॉफ़्टवेयर और ब्रांड में निहित होता है, जबकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल लगभग पूरी तरह अनुसंधान, आँकड़ों तथा सॉफ़्टवेयर पर निर्भर होते हैं।
विश्व अमूर्त निवेश रिपोर्ट (WIIH) 2026 : प्रमुख बिंदु
- यह विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) एवं लुइस बिजनेस स्कूल (LBS) का संयुक्त प्रकाशन है।
- इसमें 29 अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया है, जो नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 57% तथा क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर लगभग 45% का प्रतिनिधित्व करती हैं।
- कुल निवेश के आधार पर संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और जर्मनी सबसे बड़े निवेशक हैं, जबकि निवेश की तीव्रता के आधार पर स्वीडन, अमेरिका और फ्रांस अग्रणी हैं।
- भारत, जापान और फिलीपींस में अमूर्त निवेश की सबसे तेज़ वृद्धि दर्ज की गई।
- रिपोर्ट का 2026 संस्करण ब्रांडों के रणनीतिक महत्त्व को भी रेखांकित करता है तथा यह बताता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अमूर्त निवेशों के बीच संबंध किस प्रकार बदल रहा है।
प्रमुख निष्कर्ष
1. अमूर्त निवेश ने मूर्त निवेश को पीछे छोड़ा
- अमूर्त निवेश, भवनों एवं मशीनरी जैसे मूर्त निवेश की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से बढ़ रहा है।
- वर्ष 2025 में 29 अर्थव्यवस्थाओं में अमूर्त निवेश 10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया।
- 2008 से 2025 के बीच अमूर्त निवेश में 3.5% वार्षिक वृद्धि हुई, जो मूर्त निवेश (0.98%) की तुलना में तीन गुना से अधिक है।
विभिन्न देशों की स्थिति
- जापान, कनाडा एवं जर्मनी में अमूर्त निवेश लगातार बढ़ा, जबकि मूर्त निवेश स्थिर रहा या घटा। यह ज्ञान-आधारित परिसंपत्तियों की ओर संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाता है।
- अमेरिका, फ्रांस एवं यूनाइटेड किंगडम में अमूर्त तथा मूर्त दोनों प्रकार के निवेश बढ़े, लेकिन अमूर्त निवेश की वृद्धि अधिक तेज रही।
- भारत एवं फिलीपींस में मूर्त तथा अमूर्त दोनों प्रकार के निवेश में तेज़ वृद्धि हुई, हालाँकि आधारभूत संरचना में निवेश अभी भी अधिक तेज़ी से बढ़ रहा है।
- ब्राज़ील ऐसा अपवाद रहा जहाँ अमूर्त निवेश बढ़ा जबकि मूर्त निवेश घट गया।
2. सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली श्रेणी
- 2013–2023 के दौरान विश्व स्तर पर सॉफ़्टवेयर एवं डेटाबेस अमूर्त परिसंपत्तियों की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली श्रेणी रही, जिसमें 7.3% की वृद्धि दर्ज की गई।
इसके उपरांत –
- संगठनात्मक पूँजी – 4.9%
- ब्रांड – 4.4%
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से सॉफ़्टवेयर,डेटा , संगठनात्मक पूँजी तथा अनुसंधान में निवेश और अधिक बढ़ने की संभावना है।
3. सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में भागीदारी
- 1995 से सभी अर्थव्यवस्थाओं में GDP में अमूर्त निवेश का हिस्सा लगातार बढ़ा है।
- वर्ष 2025 में समग्र स्तर पर अमूर्त निवेश का हिस्सा 12.8% रहा, जबकि मूर्त निवेश 11.8% था।
- स्वीडन विश्व की सबसे अधिक अमूर्त निवेश आधारित अर्थव्यवस्था है, इसके बाद अमेरिका और फ्रांस का स्थान है।
- भारत में औपचारिक क्षेत्र का अमूर्त निवेश (2023) GDP का 10% था और लगातार बढ़ रहा है, जबकि आधारभूत संरचना विकास जारी रहने के कारण मूर्त निवेश अभी भी 19.3% है।
भारत से संबंधित प्रमुख आँकड़े
- वर्ष 2022–23 में ज्ञान-आधारित परिसंपत्तियों में निवेश वृद्धि के मामले में भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनकर उभरा।
- सॉफ़्टवेयर, अनुसंधान, ब्रांड तथा अन्य अमूर्त परिसंपत्तियों पर भारत का व्यय 7.9% बढ़ा। 15 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत ने अमूर्त निवेश में सर्वाधिक वार्षिक वृद्धि दर्ज की।
- भारत – 7.9%
- जापान – 4.8%
- फिलीपींस – 4.6%
- अमेरिका – 4.4%
- भारत अभी भी मूर्त परिसंपत्ति-प्रधान अर्थव्यवस्था है, किंतु ज्ञान-आधारित परिसंपत्तियों में निवेश तीव्र गति से बढ़ रहा है।
- भारत का सकल पूँजी निर्माण GDP के 2021 में 32% से बढ़कर 2023 में 33% हो गया।
- वर्ष 2023 में भारत का कुल अमूर्त निवेश 78 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो डेनमार्क, चेक गणराज्य तथा फ़िनलैंड जैसी कई यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं से अधिक है।
- भारत के कुल अमूर्त निवेश का लगभग 45% हिस्सा सॉफ़्टवेयर एवं डेटाबेस में था, जो रिपोर्ट में शामिल सभी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक है।
अन्य क्षेत्रों का योगदान—
- संगठनात्मक पूँजी – 21.8%
- अनुसंधान एवं विकास – 12.7%
- ब्रांड – 9.3%
- डिज़ाइन – 11%
- 2013–2023 के बीच भारत में सॉफ़्टवेयर एवं डेटाबेस क्षेत्र 8.2% चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा।
- ब्रांड निवेश में भी भारत तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा।
- 2013–2023 के दौरान ब्रांड निवेश 7.2% CAGR से बढ़ा, जिससे भारत लक्ज़मबर्ग, लिथुआनिया और डेनमार्क के बाद, लेकिन अनेक विकसित अर्थव्यवस्थाओं से आगे रहा।
अमूर्त निवेश का महत्त्व
1. उत्पादकता एवं नवाचार को बढ़ावा
- विशेष सॉफ़्टवेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिदम तथा संगठनात्मक कार्यप्रणालियाँ मशीनों की तुलना में अधिक विस्तार योग्य होती हैं।
- इससे समान भौतिक अवसंरचना के साथ अधिक उत्पादन संभव होता है।
2. वैश्विक मूल्य श्रृंखला में उन्नति
- कम लागत वाले श्रम पर आधारित बाह्य स्रोत (Outsourcing) केंद्र बने रहने के बजाय भारत बौद्धिक संपदा, अनुसंधान एवं विकास तथा मौलिक डिजाइन में निवेश कर उच्च-मूल्य उत्पाद एवं स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकसित कर रहा है।
3. डिजिटल एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अर्थव्यवस्था को गति
- आँकड़े, डेटाबेस तथा डिजिटल मंच पूरी तरह अमूर्त परिसंपत्तियाँ हैं।
- ये भारत के तीव्र गति से बढ़ते वित्तीय प्रौद्योगिकी (FinTech), ई-वाणिज्य तथा SaaS क्षेत्रों की आधारशिला हैं।
4. ब्रांड मूल्य का निर्माण
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा निर्मित सामग्री से भरे वैश्विक बाज़ार में मजबूत ब्रांड एवं व्यापार चिह्न उपभोक्ता विश्वास तथा दीर्घकालिक ग्राहक निष्ठा सुनिश्चित करते हैं।
5. रोजगार सृजन
- अमूर्त निवेश प्रौद्योगिकी, डिजाइन तथा अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में उच्च कौशल एवं उच्च आय वाले रोजगार उत्पन्न करता है।
चुनौतियाँ
1. कम आँकलन एवं मापन संबंधी त्रुटियाँ
- पारंपरिक लेखांकन प्रणाली अनुसंधान एवं विकास तथा कर्मचारियों के कौशल विकास पर होने वाले व्यय को पूँजी निवेश के बजाय व्यय मानती है।
- इससे वास्तविक आर्थिक मूल्य का सही आकलन नहीं हो पाता।
2. परिसंपत्तियों का असमान वितरण
- भारत में अमूर्त निवेश मुख्यतः सॉफ़्टवेयर एवं सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं तक सीमित है।
3. अनुसंधान एवं विकास पर कम व्यय
- विकसित देशों, विशेषकर अमेरिका की तुलना में भारत का GDP के अनुपात में अनुसंधान एवं विकास व्यय अभी भी कम है।
4. मूल्यांकन एवं वित्तपोषण की कठिनाई
- बैंक सामान्यतः भूमि, मशीनरी जैसी भौतिक परिसंपत्तियों को ही ऋण के लिए गिरवी स्वीकार करते हैं।
- भारत में पेटेंट, कॉपीराइट या सॉफ़्टवेयर जैसी अमूर्त परिसंपत्तियों के आधार पर ऋण प्राप्त करना अभी भी कठिन एवं जोखिमपूर्ण है।
5. साइबर एवं बौद्धिक संपदा संबंधी जोखिम
- अमूर्त परिसंपत्तियाँ साइबर हमलों, आँकड़ा चोरी तथा बौद्धिक संपदा की चोरी के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं।
- विशेषकर अनेक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के पास पर्याप्त साइबर सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।
भारत द्वारा उठाए गए कदम
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): इंडिया स्टैक (UPI, आधार, ओएनडीसी(ONDC), अकाउंट एग्रीगेटर की उल्लेखनीय सफलता ने व्यवसायों के लिए सॉफ़्टवेयर और डेटाबेस विकसित करने हेतु एक विशाल, मुक्त-स्रोत (Open Source) तथा अमूर्त आधारभूत संरचना उपलब्ध कराई है।
- राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (अनुसंधान NRF): शैक्षणिक संस्थानों एवं निजी अनुसंधान के लिए संरचित वित्तपोषण उपलब्ध कराकर भारत के अनुसंधान एवं विकास (R&D) पारितंत्र को सुदृढ़ करना।
- बौद्धिक संपदा सुधार: पेटेंट, डिजाइन एवं व्यापार-चिह्नों के महानियंत्रक (CGPDTM) का आधुनिकीकरण किया गया है, जिससे पेटेंट प्रसंस्करण समय में उल्लेखनीय कमी आई है।
- स्टार्टअप इंडिया एवं उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना: विनिर्माण पर विशेष बल देने वाली उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना तकनीकी स्थानीयकरण एवं डिजाइन को बढ़ावा देती है, जिससे कंपनियाँ घरेलू संगठनात्मक विशेषज्ञता (Know-how) तथा बौद्धिक संपदा (IP) में बड़े पैमाने पर निवेश करने के लिए प्रेरित होती हैं।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हेतु राष्ट्रीय रणनीति: एआई (AI) के तीव्र विकास का लाभ उठाने के लिए स्वदेशी एआई डेटासेट, कम्प्यूटिंग क्षमता (Compute Capacity) तथा एलगोरिदमिक अनुसंधान के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।
आगे और क्या किए जाने की आवश्यकता है?
- लेखांकन एवं सांख्यिकीय मानकों में संशोधन: राष्ट्रीय लेखांकन मानकों को आधुनिक मानकों के अनुरूप बनाया जाए, ताकि अमूर्त परिसंपत्तियों (Intangibles) को स्पष्ट रूप से सकल स्थिर पूंजी निर्माण (Gross Fixed Capital Formation—GFCF) के रूप में मान्यता दी जा सके।
- इससे नीति-निर्माताओं को अर्थव्यवस्था को गति देने वाले वास्तविक कारकों का अधिक यथार्थ चित्र प्राप्त होगा।
- बौद्धिक संपदा (IP) आधारित वित्तपोषण को प्रोत्साहन: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) तथा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) को ऐसे नियामकीय तंत्र एवं मानक मूल्यांकन दिशानिर्देश विकसित करने चाहिए, जिनसे वित्तीय संस्थान पेटेंट, कॉपीराइट तथा सॉफ़्टवेयर को व्यावसायिक ऋणों के लिए सुरक्षित रूप से संपार्श्विक (Collateral) के रूप में स्वीकार कर सकें।
- निवेश के दायरे का विस्तार किया जाए, ताकि सॉफ़्टवेयर सेवाओं से आगे बढ़कर डीप-टेक अनुसंधान एवं विकास (Deep-tech R&D), जैव प्रौद्योगिकी (Biotech), रचनात्मक डिजाइन(Creative Designs) तथा वैश्विक ब्रांड निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी अमूर्त निवेश को बढ़ावा मिल सके।
- साइबर सुरक्षा संबंधी कानूनों को सुदृढ़ करना: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) ढाँचा अब लागू हो चुका है।
- अगला कदम कॉर्पोरेट डेटा शासन तथा साइबर सुरक्षा अवसंरचना को और मजबूत बनाना होना चाहिए, ताकि स्वामित्व वाली डिजिटल परिसंपत्तियों (Proprietary Digital Resources) की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
- उद्योग–शिक्षा जगत सहयोग: विश्वविद्यालयों में होने वाले अनुसंधान और उसके व्यावसायिक उपयोग के बीच की दूरी को कम किया जाए, ताकि शैक्षणिक अनुसंधान एवं विकास (R&D) का सहज रूप से बाज़ार में उपयोग योग्य बौद्धिक संपदा में रूपांतरण हो सके।
स्रोत:Air